hindi Best Spiritual Stories Books Free And Download PDF

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Spiritual Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and...Read More


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महाभारत की कहानी - भाग 223 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२२७ वैशम्पायन द्वारा वर्णित उतंक की कथा   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 74 By CHIRANJIT TEWARY

त्रिजला कहती है। . जब आप इतने वर्षो से यहां पर बंद तो फिर कालदामु ने इसकी सुचना हम तक क्यो नही पहूँचायी और फिर इस संकट मे वो किसी और से भी सहायता क्यो नही मांगी । कुंम्भन ये सब सौच...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो। उत्सं दुहन्ति” (ऋग्वेद 9.112.1)इसका अर्थ समझने के लिए शब्दों और प्रसंग दोनों...

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अन्दर से विश्वास उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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मन को स्थिर रखकर सत्य को जानना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (62) की व्याख्या "न मृष्यसे"ऋगुवेद --1/116/2हार मत मानो। सामना करो।“न मृष्यसे” (ऋग्वेद 1/116/2) का अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है, इसलिए इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।श...

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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बच्चों से प्रेम या धोखा ? By prem chand hembram

  बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि हम वास्तव में अपने बच्चों से प्रेम करते हैं,तो फिर क्यों आए दिन हमारे ही बच्चे किसी...

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शक्ति धारण करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(60) की व्याख्या "श्रेष्ठ यश:"ऋगुवेद --4/33/11भावार्थ --श्रेष्ठ यश प्राप्त करो। ऋग्वेद 4/33/11 में “श्रेष्ठ यश:” का भाव वास्तव में मनुष्य को उच्च जीवन-मूल्यों की ओर प...

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 8 By Prashanth B

रविवार की सुबह। विक्रम के घर में एक शांत और आरामदायक माहौल था। उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे और माँ रसोई में हल्के-फुल्के काम में व्यस्त थीं।तभी गेट की घंटी बजी।"विक्रम! तुम्हारे दोस्...

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चरैवेति चरैवेति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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सनातन एक़ जीवंत धारा By prem chand hembram

सनातन एक जीवंत धारा क्या मनुष्य की पहचान उसकी जाति से है?क्या वह उसके सम्प्रदाय से तय होती है?या फिर उससे भी कोई गहरा सत्य है—जो हर मानव के भीतर समान रूप से विद्यमान है?मेरे चिंतन...

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महाभारत की कहानी - भाग 223 By Ashoke Ghosh

महाभारत की कहानी - भाग-२२७ वैशम्पायन द्वारा वर्णित उतंक की कथा   प्रस्तावना कृष्णद्वैपायन वेदव्यास ने महाकाव्य महाभारत रचना किया। इस पुस्तक में उन्होंने कुरु वंश के प्रसार, गांधारी...

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श्रापित एक प्रेम कहानी - 74 By CHIRANJIT TEWARY

त्रिजला कहती है। . जब आप इतने वर्षो से यहां पर बंद तो फिर कालदामु ने इसकी सुचना हम तक क्यो नही पहूँचायी और फिर इस संकट मे वो किसी और से भी सहायता क्यो नही मांगी । कुंम्भन ये सब सौच...

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श्रैष्ठ मार्ग By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति--"आर्य ज्योतिरग्रा:"ऋगुवेद-७/३३/७भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र-“आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७भावार्थ--यह...

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पीड़ितों की मदद By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

४ऋगुवेद सूक्ति-- (४२) की व्याख्या करो यत्र वरिवो बाधिताय।६/१८/१४भावार्थ --पीड़ितों की सहायता करने वाले हाथ ही उत्तम है। मंत्र +-ऋग्वेद ६/१८/१४—उसका भावार्थ “पीड़ितों की सहायता करने...

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भक्त प्रह्लाद - 20 By Siya Kashyap

इंद्र को दिया चारित्र्य दानअत्याचारी हिरण्यकशिपु के अंत के पश्चात् प्रह्लाद को राजसिंहासन प्राप्त हुआ। वे तीनों लोकों में अपने सद्गुणों एवं उज्ज्वल चारित्र्य के कारण प्रसिद्ध हो गए...

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प्रात जागरण का महत्व By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (43) की व्याख्या "प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा  दधाति"ऋगुवेद-- 1/125/1भावार्थ--प्रात: जागने वाला प्रातकाल का ऐश्वर्य पाता है।मंत्र दिया है—“प्रात: रत्नं प्रातरिश्वा दधा...

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मूल विज्ञान की अवधारणा: सिद्धांतों से पूर्व का अस्तित् ववेदांत 2.0 By Vedanta Life Agyat Agyani

अस्तित्ववेदांत 2.0: सृष्टि, मनुष्य और सिद्धांतों के निर्माण से पहले की 'मूल विज्ञान' और 'केवल समझ' की अवधारणा का शोधसमकालीन दार्शनिक परिदृश्य में 'वेदांत 2.0&#3...

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विचारों का संग्राम By prem chand hembram

विचारों का संग्राम(उपशीर्षक: क्या मैं आस्तिक हूँ?)प्रातःकाल का समय था।पूरा नगर अभी नींद की गोद में था, पर पंडित सम्पूर्ण झा के आँगन से संस्कृत श्लोकों की मधुर, स्पष्ट ध्वनि उठ रही...

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प्रकाश की ओर बढ़ो। By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(45)की व्याख्या उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्तउत्तरे।ऋग्वेद- 1/115/1भाव--अन्धकार से ऊपर उठकर प्रकाश की ओर बढ़ो।यहाँ जो मन्त्र उद्धृत किया है, वह वास्तव में अत्यन्त...

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जल-छाया By Makvana Bhavek

जल-छायाहिमालय की गोद में बसा कुमाऊँ का छोटा सा गाँव धारकोट, जहाँ सुबह की हवा में देवदार की खुशबू घुली रहती थी और शाम ढलते ही पहाड़ों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था। यहाँ के लोग म...

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अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (65) की व्याख्या "उत्सं दुहन्ति"ऋगुवेद --9/112/1भावार्थ --अन्दर से उत्साह उत्पन्न करो। उत्सं दुहन्ति” (ऋग्वेद 9.112.1)इसका अर्थ समझने के लिए शब्दों और प्रसंग दोनों...

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अन्दर से विश्वास उत्पन्न करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद  सूक्ति-- (64)की व्याख्या "विश्वासं धेहि"ऋगुवेद --10/48/5भावार्थ --मन में विश्वास स्थापित करो। ऋग्वेद 10/48/5 — पूरा मंत्रमंत्र (संस्कृत):विश्वासं धेहि मे मनो यथा त्वं मघवन्...

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मन को स्थिर रखकर सत्य को जानना By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (63)की व्याख्या "धियं धारय"ऋगुवेद --8/1/5भावार्थ -- मन को स्थिर रखो।मंत्र:“धियं धारय” — ऋग्वेद 8.1.5 शब्दार्थ--धियं (धियः) = बुद्धि, मन, विचारशक्ति।धारय = ध...

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हार मत मानो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (62) की व्याख्या "न मृष्यसे"ऋगुवेद --1/116/2हार मत मानो। सामना करो।“न मृष्यसे” (ऋग्वेद 1/116/2) का अर्थ थोड़ा सूक्ष्म है, इसलिए इसे सही संदर्भ में समझना ज़रूरी है।श...

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व्याख्या ऋगुवेद की By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग्वेद मण्डल 4, सूक्त 9, मन्त्र 6 का “बलं धेहि” पद अत्यन्त सारगर्भित है। मूल मन्त्र (ऋग्वेद 4/9/6)बलं...

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बच्चों से प्रेम या धोखा ? By prem chand hembram

  बच्चों से प्रेम या धोखा ?यह ऐसा प्रश्न है जिसका उत्तर लगभग हर कोई “हाँ” में देता है।लेकिन यदि हम वास्तव में अपने बच्चों से प्रेम करते हैं,तो फिर क्यों आए दिन हमारे ही बच्चे किसी...

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शक्ति धारण करो By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(60) की व्याख्या "श्रेष्ठ यश:"ऋगुवेद --4/33/11भावार्थ --श्रेष्ठ यश प्राप्त करो। ऋग्वेद 4/33/11 में “श्रेष्ठ यश:” का भाव वास्तव में मनुष्य को उच्च जीवन-मूल्यों की ओर प...

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वृक्ष वाणी : पर्यावरण सिद्धों का उदय - 8 By Prashanth B

रविवार की सुबह। विक्रम के घर में एक शांत और आरामदायक माहौल था। उसके पिता अखबार पढ़ रहे थे और माँ रसोई में हल्के-फुल्के काम में व्यस्त थीं।तभी गेट की घंटी बजी।"विक्रम! तुम्हारे दोस्...

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चरैवेति चरैवेति By GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:--नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीनभवति = होता है / बनता ह...

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सनातन एक़ जीवंत धारा By prem chand hembram

सनातन एक जीवंत धारा क्या मनुष्य की पहचान उसकी जाति से है?क्या वह उसके सम्प्रदाय से तय होती है?या फिर उससे भी कोई गहरा सत्य है—जो हर मानव के भीतर समान रूप से विद्यमान है?मेरे चिंतन...

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